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Anmol Vachan Part 18 In Hindi

      अनमोल वचन पार्ट - 18 Best motivational and inspirational thoughts in hindi language. Useful thoughts for constructing charactor of growing students.  ANMOL VACHAN PART - 18 **************************************  1   परिवार से बढ़कर कोई धन नहीं , पिता से बढ़कर कोई सलाहकार नहीं , भाई  से बढ़कर कोई भागीदार नहीं , माँ से बढ़कर कोई दुनियां नहीं , पत्नी से बढ़कर कोई दोस्त नहीं , बहन से बड़ा कोई शुभचिंतक नहीं।  2   इच्छाएं पूरी न हो तो क्रोध बढ़ता है , और इच्छाएं पूरी होती है तो लोभ बढ़ता है। इसलिए जीवन की हर परिस्थिति में धैर्य बनाये रखना ही श्रेष्ठ्ता है। मानव चाहे कितनी भी बनावट कर ले पर अँधेरे में छाया , बुढ़ापे में काया और अंत समय में माया साथ नहीं देती। 3   ताकत और पैसा जिंदगी के फल हैं। परिवार और मित्र जिंदगी की जड़ हैं। हम फल के बिना जिन्दा रह सकते हैं पर जड़ के बिना खड़े नहीं हो सकते। 4   आत्मा तो हमेशा से ही जानती है कि सही क्या है और गलत क्...

Anmol Vachan Part 2 In Hindi

 Anmol Vachan Part-2 In Hindi

अभी तो असली मंजिल पाना बाकि है , 

अभी तो इरादों का इम्तिहान बाकि है ,

अभी तो तोली है मुट्ठी भर जमीं , 

अभी तो तोलना आसमान बाकि है  

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किसी भी इंसान के जीवन पर उसके विचारों का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। जैसे - जैसे इंसान के विचार बढ़ते जाते हैं वैसे - वैसे इंसान का विकास होता जाता है।

हम एक दूसरे को बदलने की बहुत कोशिश करते हैं पर ऐसा नहीं हो पता है। किसी भी इंसान को यदि बदलना है तो उसके विचारों को बदलो, वो इंसान खुद-व् -खुद बदल जायेगा। इसलिए मेरा ये मानना है कि हर इंसान के पास कुछ ऐसे विचार होने चाहिए जो उसे मुसीबत के वक़्त रास्ता दिखाते हों। फिर वो इंसान जीवन के सफर में किसी भी गलत रस्ते पर नहीं जायेगा।

इंसान के जीवन में अच्छे विचारों का समावेश बचपन से ही हो जाना चाहिए। क्योंकि बचपन इंसान के जीवन का वो समय है जिसमें वो जो भी सीखता है वो उसे सारी उम्र भर याद रहता है।

इस पोस्ट में हम कुछ ऐसे विचार दे रहे हैं जिन्हे यदि कोई इंसान अपने जीवन में उतरता हे तो उसे जीवन भर कोई भी फैसला लेते वक़्त बहरी लोगों की जरूरत नहीं पड़ेगी और वो कभी भी किसी भी हीन भावना का शिकार नहीं हो पायेगा। हम ये विचार आगे दे रहे हैं।

अनमोल वचन

1. जब इंसान के पास एक स्पष्ट लक्ष्य, सच्चा प्रेम और पूरा समर्पण होता है, तो वह अपने शरीर और जीवन दोनों पर नियंत्रण पा लेता है।

2. एक ही उद्देश्य पर पूरी निष्ठा से काम करना सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

3. सफलता का आधार केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत, दृढ़ इच्छा और समर्पण होता है।

4. आत्मविश्वास सफलता की ओर बढ़ने वाली पहली सीढ़ी है।

5. समाज उसी व्यक्ति का सम्मान करता है जिसके भीतर श्रेष्ठ गुण हों। जैसे मछलियाँ पानी में जीवन पाए बिना नहीं रह सकतीं, पर गंदगी उन्हें स्वीकार नहीं होती।

6. सफलता प्राप्त करने के लिए छोटी बातों से ऊपर उठना बेहद जरूरी है। हमेशा मुस्कुराकर मिलें और अपनी परेशानियाँ दूसरों पर न थोपें।

7. दूसरों की मदद लेने में कभी संकोच न करें। और यदि आप किसी को सलाह दें, तो वही दें जिसे सच में आवश्यकता हो।

8. दूसरों की गलतियों पर क्रोधित होने की बजाय उन्हें अनदेखा करना अधिक अच्छा है।

9. दूसरों की प्रशंसा करने का अवसर कभी न चूकें, परन्तु चापलूसी और सत्य प्रशंसा में फर्क बनाए रखें।

10. पेड़ स्वयं धूप सहता है लेकिन अपनी छाया से दूसरों को राहत देता है।

11. यदि मन में काम, क्रोध और लोभ भरा हो, तो ज्ञानी और अज्ञानी दोनों समान प्रतीत होते हैं।

12. व्यवहार एक ऐसा दर्पण है जिसमें हर व्यक्ति का वास्तविक स्वरूप दिखाई देता है।

13. ऐसा कोई काम न करें जिसे दूसरों से छिपाने की आवश्यकता महसूस हो।

14. आनंद मनुष्य के भीतर ही है, जो सत्य की खोज से प्राप्त होता है।

15. ईश्वर और मनुष्य के बीच की दूरी आत्मा जोड़ती है। भगवान दुख नहीं देते; हम अपने दोषों के कारण कष्ट झेलते हैं।

16. मंज़िल तक पहुँचने के लिए चलना आवश्यक है; प्रयास किए बिना सफलता नहीं मिलती।

17. दूसरों से द्वेष रखने से उन्हें नहीं, बल्कि आपका अपना मन खराब होता है।

18. यदि आप कमाई से कम खर्च करते हैं, तो समझ लें कि यह एक अनमोल वरदान है।

19. फूल काँटों में रहकर भी प्रसन्न रहते हैं, लेकिन इंसान महलों में रहकर भी दुखी हो सकता है।

20. गुरु वही योग्य है जो सत्य-असत्य का स्पष्ट भेद सिखाए और स्वयं भी अपने उपदेशों का पालन करे। असत्य विचारों वाला दुखी होता है और दुष्कर्म करने वाला भोग में फँस जाता है।

21. जिन लोगों का मन सकारात्मक और आध्यात्मिक विचारों से भरा रहता है, वे उत्साहपूर्ण और दीर्घायु बने रहते हैं।

22. जहाँ आदर्श पुत्र, पतिव्रता पत्नी और संतोषी व्यक्ति रहते हैं, वही घर स्वर्ग जैसा होता है।

23. पुत्र को पाँच वर्ष प्रेम दें, अगले दस वर्ष अनुशासन दें और सोलह वर्ष के बाद मित्र की तरह व्यवहार करें।

24. जो लोग दूसरों के लिए जीते हैं, वे अक्सर अकेले रह जाते हैं।

25. आजकल लोगों से बोलने से पहले बहुत सोचने की आवश्यकता है, क्योंकि अब रिश्ते दिल से नहीं दिमाग से निभाए जाते हैं।

26. खुद को इतना सरल न बनाएं कि हर कोई आपका उपयोग करने लगे; बिना करंट वाली तारों पर लोग कपड़े सुखाते हैं।

27. जब मनुष्य का अहंकार और लालच बढ़ जाता है, तो वह किसी से सच्चे दिल से गले नहीं मिल पाता।

28. दुनिया में कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता, इसलिए रिश्तों में कुछ कमियाँ नजरअंदाज़ करना आवश्यक है।

29. जो आपको गति से हरा  नहीं सकते, वे अक्सर आपको मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश करते हैं।

30. कठिन समय में अकसर लगता है कि परमात्मा हमारी सुन क्यों नहीं रहा, पर याद रखें— परीक्षा के दौरान शिक्षक मौन रहता है।

31. जीवन में थोड़ा खाली समय होना जरूरी है, क्योंकि यही पल हमें अपने भीतर से मिलाता है।

32. यदि पैर कीचड़ में फँस जाए तो नल के पास जाना चाहिए, लेकिन कीचड़ देखकर नल से दूर नहीं रहना चाहिए। उसी तरह कठिन समय में पैसे का सही उपयोग करें, पर पैसे देखकर गलत रास्ते पर न जाएँ।

33. रिश्तों में नफरत इसलिए बढ़ रही है क्योंकि लोग अनजान लोगों को महत्व देने में लगे हैं, जबकि अपनों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।

34. बाजार में सबकुछ मिल सकता है, पर माँ की ममता और पिता का सहारा कभी नहीं खरीदा जा सकता।

35. गुरु और शिक्षक

गुरु और शिक्षक दोनों सम्माननीय हैं, पर गुरु जीवन को सही दिशा देता है जबकि शिक्षक आजीविका का ज्ञान देता है। गुरु संपूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण करता है और जीवनभर मार्गदर्शक बना रहता है।

36. किसी भद्रपुरुष ने चाणक्य से पूछा - जहर क्या है ?

चाणक्य के अनुसार, जो भी वस्तु आवश्यकता से अधिक हो जाती है, वही जहर बन जाती है— चाहे वह धन हो, शक्ति हो, भूख हो, प्रेम हो, घृणा हो या अहंकार।

  

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