Hindi Shayari Part 22
हिंदी शायरी पार्ट -22
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1 |
किस हक से मांगू तुमसे वक्त मेरी जान, ना तुम मेरे हो न वक्त मेरा है। |
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2 |
ज्यादा अच्छा होना भी बेवकूफी है, पता नहीं चलता कि लोग कदर कर रहे हैं या इस्तेमाल। |
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3 |
कितने आराम से छोड़ दिया तूने बात करना, जैसे सदियों से तुम पर बोझ थे हम। |
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4 |
आँखों ने तुम्हे देखा था , और दिल ने तुम्हें पसंद किया था , अब तुम्ही बताओ कि ऑंखें निकल दूँ या दिल। |
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5 |
अगर हम उन्हें ना छोड़ें तो वो हमे कहीं का नहीं छोड़ते। |
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6 |
और इंसान बदलकर जहर हो रहे हैं। |
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7 |
दिल से अपनाया न उसने , गैर भी समझा नहीं , ये भी इक रिस्ता है जिसमे, कोई भी रिस्ता नहीं। |
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8 |
ज्यादा अच्छा होना भी बेवकूफी है , पता नहीं चलता के लोग कदर कर रहे हैं या इस्तेमाल। |
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9 |
मुझे सबसे पहले रखो या न रखो , मुझे जहां भी रखना वहां किसी और को मत रखना। |
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10 |
अधूरा ही रहा मेरा हर सफर, कभी रास्ता खो गया, कभी हमसफ़र। |
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11 |
जो भूल गए उसे भूल जाने दो , वो सब याद करेंगे थोड़े मतलब के दिन आने दो। |
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12 |
वो बात करने के लिए भी राजी नहीं , और हम मिलने की हसरत लगाए बैठे हैं। |
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13 |
पसंदीदा शख्स से कभी नफरत नहीं हो सकती , चाहे वो कितनी भी तकलीफ दे दे। |
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14 |
हर बात पे बहस करना फितरत नहीं मेरी , मैंने खुद को गलत माना और बात ख़त्म कर दी। |
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15 |
वक़्त के साथ सब बदल जाता है लोग भी और उनके वादे भी , इसलिए जब कोई बदल जाये तो रोना मत बस ये समझ जाना , कि उनका किरदार तुम्हारी जिंदगी में इतना ही था। |
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16 |
उसका मन होता है तो बात हो जाती है , वरना सुबह से शाम और शाम से सुबह हो जाती। |
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17 |
जिसे पैसा भी न खरीद सके मुझे वो किरदार पसंद है , खूबसूरत चेहरे तो बहुत देखे हैं लेकिन मुझे वफादार पसंद है। |
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18 |
बड़े बजुर्ग कहते हैं , फसल रंग बदले तो काट दो , जब लोग रंग बदले तो उन्हें जिंदगी से छाँट दो। |
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19 |
शोर बहुत है मगर अब सुनाए नहीं देगा , दिल दर्द का अब चेहरे पे दिखे नहीं देगा , तुझसे बनाने के लिए मैंने इतनी बिगड़ ली सबसे , अब तो मेरे हक़ में भी कोई गवाही नहीं देगा। |
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20 |
कभी तो मिल पहली मुलाकात की तरह , क्यों बिगड़े रहते हो हालत की तरह , वो एक शख्स जो लगे जान से भी प्यारा , वक़्त तो देता है मगर खैरात की तरह। |
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21 |
चुभ जाती है बातें, कभी कभी लहजे मार जाते हैं , ये जिंदगी है जनाब , यहां गैरों से नहीं, हम अपनों से हार जाते हैं। |
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22 |
नजर चाहती है दीदार करना , दिल चाहता है प्यार करना , क्या हल बताऊं मैं अपना, नसीब में लिखा है सिर्फ इंतजार करना। |
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23 |
राहत भी अपनों से मिलती है , और चाहत भी अपनों से मिलती है , इसलिए अपनों से कभी रूठना मत , क्योंकि मुस्कुराहट भी अपनों से मिलती है। |
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24 |
पागल कर देती है मोहब्बत , हर मोहब्बत करने वाले को , क्योंकि इश्क हार नहीं मानता , और दिल बात नहीं मानता। |
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25 |
जितना सुधार दिया है खुद को मैंने , उतना तो मैं खाब भी नहीं था , जिस बेरहमी से तोडा है जिंदगी तूने , उतना बड़ा तो मेरा कहब भी नहीं था। |
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26 |
मेरे जिंदगी के राज में एक राज तुम भी हो , मेरी ख्वाइशों की आस में इक आस तुम भी हो , तुम क्या हो मेरे लिए , कुछ हो या कुछ भी नहीं , मगर मेरी जिंदगी के काश में , इक काश तुम भी हो। मेरे हर ख़ामोश ख़्वाब की खामोशी तुम भी हो, मेरी उलझी हुई राहों की मंजिल तुम भी हो। मैं जो खुद को ढूँढती हूँ हर एक सवाल में, उस हर सवाल का सबसे हसीन जवाब तुम भी हो। |
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27 |
यदि शायरी से तेरा दिल जीता जा सकता, तो मैं हर लफ्ज में मोहब्बत की कहानी लिखता , तू पढ़ती मुस्कराती पिघल जाती मेरे लिए , मैं अपनी हर धड़कन को तेरे नाम लिखता। |
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28 |
जो मिल नहीं सकता उसी से प्यार है, एक को कोई फर्क नहीं पड़ता, और दूसरा जान देने को तैयार है। |
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29 |
हमे क्या क्या बुरा लगा था , बाकि सब कुछ दिल में दबाके रखा हूँ अभी किसीसे कुछ भी नहीं कहना । |
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30 |
किसी को अपना मानना और उस पर हक़ जताना , पर वो इंसान हमे हर बार, फालतू होने का एहसास दिलाता रहता है। |
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31 |
तकदीर ने जैसे चाहा वैसे ढल गए हम , बहुत सम्भाकर चले , फिर भी फिसल गए हम , किसी ने भरोसा तोडा तो किसी ने दिल , और लोगों को लगता है बहुत बदल गए हम। |
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किस्मत की बाजियों पर इख़्तेयार नहीं है , सब कुछ है जिंदगी में मगर प्यार नहीं है , कोई था जिसे याद करके जी रहे हैं हम, आँखों में अब किसी का इंतजार नहीं है। |
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34 |
आहिस्ता चल ऐ जिंदगी, अभी कुछ कर्ज चुकाना बाकि है, कुछ दर्द मिटाना बाकि है, कुछ फर्ज निभाना बाकि है, रफ्तार में तेरे चलने से, कुछ रूठ गए कुछ छूट गए, रूठों को मनाना बाकि है, रोतों हो हसाना बाकि है। कुछ हसरतें अभी अधूरी है, कुछ काम जो बहुत जरूरी है, ख्वाइशें जो घुट गई इस दिल में, अभी उन्हें दफनाना बाकि है, कुछ रिश्ते बनके टूट गए, कुछ बनते बनते छूट गए, उन टूटे छूटे रिश्तों के, जख्मों को मिटाना बाकि है, आहिस्ता चल ऐ जिंदगी, अभी कुछ कर्ज चुकाना बाकि है। |
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35 |
गुजरी हुई जिंदगी को याद न कर, तकदीर में जो लिखा है उसकी फरियाद न कर, जो होगा वो होकर रहेगा, तू कल की फिक्र में अपनी आज की हंसी बर्बाद न कर, हंस मरते हुए भी गाता है, और मोर नाचते हुए भी रोता है। यह जिंदगी का फंडा है, दुखों वाली रात नींद नहीं आती, और खुशी वाली रात कौन सोता है, कल ना हम होंगे ना कोई गिला होगा, सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिलसिला होगा, जो लम्हे है जितने भी हंस कर बिता लेना, ना जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा। वक्त बदलता है जिंदगी के साथ, जिंदगी बदलती है वक्त के साथ, वक्त नहीं बदलता अपनों के साथ, पर अपने बदल जाते हैं वक्त के साथ। |

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