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Anmol Vachan Part 18 In Hindi

      अनमोल वचन पार्ट - 18 Best motivational and inspirational thoughts in hindi language. Useful thoughts for constructing charactor of growing students.  ANMOL VACHAN PART - 18 **************************************  1   परिवार से बढ़कर कोई धन नहीं , पिता से बढ़कर कोई सलाहकार नहीं , भाई  से बढ़कर कोई भागीदार नहीं , माँ से बढ़कर कोई दुनियां नहीं , पत्नी से बढ़कर कोई दोस्त नहीं , बहन से बड़ा कोई शुभचिंतक नहीं।  2   इच्छाएं पूरी न हो तो क्रोध बढ़ता है , और इच्छाएं पूरी होती है तो लोभ बढ़ता है। इसलिए जीवन की हर परिस्थिति में धैर्य बनाये रखना ही श्रेष्ठ्ता है। मानव चाहे कितनी भी बनावट कर ले पर अँधेरे में छाया , बुढ़ापे में काया और अंत समय में माया साथ नहीं देती। 3   ताकत और पैसा जिंदगी के फल हैं। परिवार और मित्र जिंदगी की जड़ हैं। हम फल के बिना जिन्दा रह सकते हैं पर जड़ के बिना खड़े नहीं हो सकते। 4   आत्मा तो हमेशा से ही जानती है कि सही क्या है और गलत क्...

Hindi Shayari Part 17

   हिंदी शायरी पार्ट -17

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हिंदी शायरी पार्ट-17

1

 मिले ना फूल तो कांटों से दोस्ती कर ली,

 बस इस तरह बसर हमने अपनी जिंदगी कर ली‌

2

जो अपना नहीं उस पर हक़ क्या जताना , 

जो तकलीफ न समझे उसे दर्द क्या बताना।

3

न मोहब्बत न दोस्ती के लिए।, 

वक़्त रुकता नहीं किसी के लिए , 

अपने दिल को दुःख न दे यूँ  ही , 

इस जमाने की बेरुखी के लिए। 

4

 कसूर तो बहुत किये हैं  साहिब, 

मगर सजा वही मिली जहां बेकसूर थे हम।  

5

फासले  होते नहीं, बनाए जाते हैं।  

मीलों दूर रहकर भी रिश्ते निभाए जाते हैं। 

दिखावे से जिंदगी नहीं चलती।  

क्योंकि कुछ रिश्ते भरोसे से निभाए जाते हैं। 

6

कोई खुशियों की चाह में रोया, 

तो कोई दुखों की पनाह में रोया, 

अजीब सिलसिला है ये  जिंदगी का, 

कोई भरोसे के लिए रोया, 

तो कोई भरोसा करके रोए। 

7

न जाने क्यों मेरा हर दोस्त मुझे आजमाता है , 

जिसको आगे बढाता  हूँ , वही  पीछे हटाता है , 

खता इसमें मेरी क्या है , यही मेरा मुक्ददर है , 

सहारा जिसको देता हूँ, वही नीचे  गिराता  है। 

8

यह सच है आजकल मैं जरा मुश्किलों में हूं, 

बस जिंदगी गुजारने की कोशिशों  में हूं, 

इस कदर दर्ज चूर कर दिया है अब थकान  ने, 

कि  खुद को खबर नहीं है मैं किन रास्तों में हूं। 

9

थोड़ी तो मोहब्बत हुई होगी उसे मुझसे, 

वरना सिर्फ दिल रखने  के लिए इतना वक्त कौन बर्बाद करता है। 

10

बुरा नहीं हूं मैं, मेरी भी इक  कहानी है, 

यह जो बदला बदला सा लगता हूं अपनों की ही मेहरबानी है, 

गैर तो गैर हैं, गैरों से गिला क्या, 

पर अपने तो अपने हैं, लेकिन अपनों से मिला क्या। 

11

फरिश्ते भी रोते हैं मुझे देखकर, 

किसी ने इस कदर रुलाया है मुझे, 

मोहब्बत के नाम से भी डर लगता है, 

किसी ने इस कदर ठुकराया  है मुझे। 

12

टूटना तकलीफ नहीं देता, 

टूट कर जुड़े रहना तकलीफ देता है। 

13

मैं तबाह हूं तेरे इश्क में, 

तुझे दूसरों का ख्याल है, 

जरा मुझ पर भी गौर कर, 

मेरी तो जिंदगी का सवाल है। 

14

कुछ दिनों से मैं खुद से खफा सा बैठा हूं।

मैं अपनी जिंदगी को तमाशा बनाकर  बैठा हूं।

जितना लोग पाने  की ख्वाहिश रखते हैं।

उतना मैं पहले से गवा कर बैठा हूं ।

15

एक अच्छा रिश्ता रहा तुमसे, 

एक अच्छी याद हो तुम, 

बहुत कुछ कहना था तुमसे, 

मगर अब आजाद हो तुम। 

16

पढ़ नहीं पाओगे तुम उदासियाँ  कभी मेरी, 

मुस्कुराने के  हुनर में बहुत माहिर हैं हम। 

17

तेरे दिन अच्छे हैं, तो हमसे किनारा कर लो, 

हम बुरे लोग बुरे वक्त में काम आते हैं। 

18

 जिंदगी से बड़ी कोई सजा ही नहीं,

मेरा क्या जुर्म है, मुझे पता ही नहीं,

 कितने हिस्सों में बट गया हूं मैं, 

मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं। 

19

मुझ पर है सैकड़ो इल्जाम, मेरे साथ न चल, 

तू भी हो जाएगी बदनाम, मेरे साथ न चल, 

तू नई सुबह की उजली सी  किरण, 

मैं हूं धूल भरी शाम,  मेरे साथ ना चले। 

20

दुख अपना हमें अगर बताना नहीं आता, 

तुमको भी तो अंदाजा लगाना नहीं आता, 

ढूंढे हैं तो पलकों पर चमकने के बहाने, 

आंसू को मेरी आंख में आना नहीं आता। 

21

यह अलग बात है, कि मुकद्दर नहीं बदला अपना, 

एक ही दर पे  रहे, दर नहीं बदला अपना, 

ये इश्क का खेल है, शतरंज नहीं है जाना, 

मात खाई है, मगर घर नहीं जाना। 

22

निस्वार्थ समर्पण को कमजोरी मत समझो, 

मन  के रिश्ते को कच्ची डोरी मत समझो, 

तुम पढ़ ना सके यह कमजोरी तुम्हारी अपनी है, 

मेरे मन की किताब को कोरी मत समझो। 

23

जिंदगी कुछ यूं गुजारी जा रही है, 

जैसे एक जंग हारी जा रही है, 

जहां पर पहले से जख्म के निशान थे, 

फिर से वहीं पर चोट मारी जा रही है।

24

 जितना सुधार  दिया है खुद को मैने , 

इतना तो मैं खराब भी न था , 

जिस बेरहमी से तोडा है जिंदगी तूने , 

उतना बड़ा तो मेरा खाब  भी न था। 

25

 मुझे इस कदर शौक था तुझसे मिलने का , लेकिन 

तेरा लहजा देखकर तेरी तमन्ना ही छोड़ दी। 

26

 जिंदगी में किसी का साथ ही काफी है , 

कंधे पर किसी का हाथ ही काफी है  , 

दूर हो या पास क्या फर्क पड़ता है , 

अनमोल रिश्तों का तो बस  एहसास ही काफी है।

27

 इतना कमजोर किरदार नहीं है हमारा , 

कि वफादार होने की सफाई देते फिरें , 

हमे यकीन है अपने किरदार पर , 

जो खोयेगा ढूंढ़ता फिरेगा। 

28

 मसला तुझे पाने का कभी था ही नहीं , 

इरादा उम्र भर चाहने का था, जो आज भी कायम है। 

29

तकलीफ तो बहुत है जिंदगी में पर किसी से कोई गिला नहीं , 

जो बिना बोले ख़ामोशी समझ सके ऐसा कोई मिला ही नहीं। 

30

 रात भर इंतजार किया उसके जबाब आने का , 

सुबह एहसास हुआ जबाब न आना भी तो एक जबाब है। 

31

 ठंडा मौसम हल्की बारिश, हाथ में उसका हाथ था, 

चंद कदम साथ चले थे, आंख खुली तो ख्वाब था। 

32

 बात इतनी सी थी कि तुम अच्छे लगते थे, 

अब बात इतनी बढ़ गई है, 

कि तुम्हारे बिना कोई अच्छा ही नहीं लगता। 

33

पहले लगता था के तुम ही दुनियां हो , 

पर अब लगता है के तुम भी एक दुनियां हो। 

34

माना  के  दूरियां कुछ बढ़ सी गई है, 

मगर तेरे हिस्से का वक्त आज भी तनहा  रखा है मैंने। 

35

मन ना मिला तो कैसा नाता, 

चला  अकेला ठोकर खाता, 

जितने थे झूठे वादे थे, 

सुख पर बिके  सभी प्यादे थे, 

जाने क्यों मैं समझ ना पाया, 

जग के नियम बड़े सादे थे, 

अपना ही मैं स्वर दोहराता, 

चला  अकेला ठोकर खाता, 

फिर तो जो बाधाएं  आई, 

आगे बढ़कर मैंने गले लगाई, 

उतना ही मैं कुशल हो गया, 

जितनी मैंने असफलताएं पाई, 

अपने घाव  स्वयं सहलाता, 

चला  अकेला ठोकर खाता। 


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