Anmol Vachan Part 8 In Hindi

 अनमोल वचन पार्ट - 8

ANMOL VACHAN PART - 8

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1. शरीर को जल पवित्र करता हैमन को सत्य शुद्ध करता है और बुद्धि को ज्ञान निर्मल बनाता है।


2. परमात्मा का संदेश है कि जैसे रात जितनी अधिक अंधेरी होती हैतारे उतने ही अधिक चमकते हैंवैसे ही दुःख जितना गहरा होता हैईश्वर उतना ही निकट होता है।


3. चतुराई कई बार नुकसान पहुँचा देती हैज्ञान के बावजूद व्यक्ति डगमगा सकता हैलेकिन सरल और निष्कपट लोगों को नारायण सहज ही प्राप्त हो जाते हैं।


4. यदि किसी के साथ रहकर आप उसे प्रसन्न नहीं रख पा रहे हैंतो उससे दूरी बना लेना ही बेहतर होता हैक्योंकि कभी-कभी दूरी ही शांति का कारण बन जाती है।


5. जो लोग धैर्य के साथ प्रतीक्षा करना जानते हैंउनके पास जीवन की आवश्यक चीजें किसी न किसी रूप में स्वयं पहुँच जाती हैं।


6. जिस क्षण हमारा मन दूसरों के लिए शुभ सोचने लगता हैउसी क्षण से हमारे जीवन में शांति का प्रवेश हो जाता है।


7. आत्मामहात्मा और परमात्मा—ये तीनों ही शब्द माँ के अस्तित्व के बिना अधूरे हैं।


8. विश्वास बनाए रखें कि जो बीत गया वह अच्छा थाजो वर्तमान में है वह उससे बेहतर है और जो आने वाला हैवह सर्वोत्तम होगा।


9. क्रोध के समय थोड़ा रुक जाना और गलती होने पर थोड़ा झुक जानाजीवन को सरल बना देता है।


10. स्वयं का खुश रहना अच्छी बात हैलेकिन आपकी वजह से कोई और खुश हो जाएयह सबसे बड़ी खुशी होती है।


11. कर्म हमें यह सिखाता है कि जीवन में एक समय ऐसा अवश्य आता हैजब कुछ लोग यह सोचकर पछताते हैं कि उन्होंने हमारे साथ गलत व्यवहार क्यों किया।


12. जीवन में सभी चीजें एक साथ कभी नहीं मिलतीं। किसी के पास धन होता है तो रिश्तों की कमी रहती हैरिश्ते होते हैं तो धन कम पड़ता हैदोनों होते हैं तो स्वास्थ्य कमजोर हो सकता है और यदि ये तीनों होंतो जीवन सीमित रह जाता है।


13. सच तो यह है कि जीवन समय के अधीन है। कितनी भी योजनाएँ बना लेंहोता वही है जो समय तय करता है।


14. उम्र हमें थका नहीं सकती और ठोकरें हमें गिरा नहीं सकतीं। यदि जीतने की दृढ़ इच्छा होतो परिस्थितियाँ भी पराजित नहीं कर सकतीं।


15. एक-दूसरे की कमियाँ खोजने के बजाय यदि हम एक-दूसरे को समझने का प्रयास करेंतो रिश्ते और भी मजबूत हो जाते हैं।


16. भावुक लोग रिश्तों को सहेजते हैंव्यवहारिक लोग उनसे लाभ उठाते हैं और पेशेवर लोग लाभ देखकर ही संबंध बनाते हैं।


17. न घमंड में रहना चाहिए और न ही अहंकार में। जिनसे विचार मेल न खाएँउनसे दूरी बनाए रखना ही समझदारी है।


18. जीवन एक खेल की तरह हैयह आप पर निर्भर करता है कि आप खिलाड़ी बनते हैं या खिलौना।


19. अपनी पहचान शांत भाव से बनाइएसमय आने पर हवाएँ स्वयं आपका नाम गुनगुनाएँगी।


20. प्रेम का विरोध भी पूरे संसार में है और प्रेम की भूख भी पूरे संसार को है।


21. प्रेम केवल अपने कर्म और ईश्वर से करेंक्योंकि यही दो ऐसे हैं जो कभी धोखा नहीं देते।


22. तीर्थों में सबसे श्रेष्ठ तीर्थ हमारा हृदय है। जितना अधिक यह निर्मल और निष्पाप होगाउतने ही तीर्थ हमारे समीप होंगे।


23. अपनी अकड़ को सदैव नियंत्रण में रखेंक्योंकि लोग भाव से झुकते हैंदबाव से नहीं।


24. जीवन में चाहे हम कितनी भी प्रगति कर लेंफिर भी कई लोगों से पीछे रहेंगे और चाहे कितने भी पीछे होंफिर भी कई लोगों से आगे होंगे।


25. इसलिए अपनी स्थिति को स्वीकार कर उसका आनंद लेंक्योंकि आगे-पीछे का क्रम संसार में चलता ही रहता है।


26. दूसरों की सहायता करते समय यदि मन में सच्ची खुशी होवही वास्तविक सेवा कहलाती हैशेष सब दिखावा मात्र है।


27. बनावटसजावट और दिखावट—इन्हीं कारणों से लोगों के मूल्यों में गिरावट आती जा रही है।


28. संसार का सबसे मूल्यवान आभूषण परिश्रम है और जीवन का सबसे विश्वसनीय साथी आत्मविश्वास।


29. वे रिश्ते सबसे प्यारे होते हैं जिनमें न अधिकार होता हैन शकन दूरी होती हैन अपनापन जताने की मजबूरी—बस आत्मीयता का एहसास होता है।


30. जहाँ दया है वहाँ धर्म हैजहाँ लोभ है वहाँ पाप हैजहाँ क्रोध है वहाँ विनाश है और जहाँ क्षमा है वहाँ स्वयं भगवान का वास होता है।


31. शक्तिशाली होकर भी विनम्र रहना एक महान गुण है और महान होकर भी साधारण बने रहना उससे भी श्रेष्ठ गुण है।


32. जो व्यक्ति सदैव सत्य बोलता हैउसकी वाणी में शक्ति आ जाती है और उसकी कही बातें सच होने लगती हैं।


33. परिवार में यदि छोटी-छोटी बातों को बड़ा बना दिया जाएतो बड़ा परिवार भी धीरे-धीरे छोटा हो जाता है।


34. उम्र निरंतर आगे बढ़ रही है और हम इच्छाओं के साथ वहीं ठहरे हुए हैं।


35. अपना वही होता हैजिसके साथ खुलकर बातें की जा सकेंन कि संभल-संभल कर।


36. कुछ मिलने पर अहंकार नहीं करना चाहिएक्योंकि देने वाला और लेने वाला एक ही है।


37. सुख में तो अनेक साथी मिल जाते हैंलेकिन दुःख में जो साथ निभाएवही सच्चा और नेक साथी होता है।


38. इस जीवन में कमाया हुआ धन अगले जन्म में साथ नहीं जातालेकिन इस जन्म में किया गया पुण्य जन्म-जन्मांतर तक फल देता है।


39. श्रीकृष्ण कहते हैं कि तुम निरंतर अच्छे कर्म करते रहोमैं हर क्षण तुम्हारे साथ रहूँगा और आवश्यकता पड़ी तो बांसुरी छोड़कर सुदर्शन चक्र भी उठा लूँगा।


40. जीवन में ऐसे लोग भी मिलते हैं जो वादे नहीं करतेलेकिन बहुत कुछ निभा जाते हैं।


41. अक्सर वही रिश्ते सबसे खास होते हैं जो एहसानों पर नहींबल्कि एहसासों पर टिके होते हैं।

 


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