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Hindi Shayari Part 22

      हिंदी शायरी पार्ट -22 Beautiful Hindi shayari, Emotional hindi shayari, Sad hindi shayari, hindi shayari based on dosti, hindi shayari collection, Best hindi shayari, हिंदी शायरी पार्ट-22 1 किस हक से मांगू   तुमसे वक्त मेरी जान ,  ना तुम मेरे हो न वक्त मेरा है।   2   ज्यादा अच्छा होना भी बेवकूफी है ,  पता नहीं चलता कि लोग कदर कर रहे हैं या इस्तेमाल।   3   कितने आराम से छोड़ दिया तूने बात करना ,   जैसे सदियों से तुम पर बोझ   थे हम।   4 आँखों ने तुम्हे देखा था ,  और दिल ने तुम्हें पसंद किया था ,  अब तुम्ही बताओ कि ऑंखें निकल दूँ या दिल।  5   कुछ लोगों को छोड़ना जरूरी हो जाता है ,  अगर हम उन्हें ना छोड़ें तो वो हमे कहीं का नहीं छोड़ते।  6   गांव बदलकर शहर हो रहे हैं ,  और इंसान बदलकर जहर हो रहे हैं।  7 दिल से अपनाया न उसन...

Hindi Poems Part - 2

Hindi Poems (कवितायेँ ) Part 2
उपदेश वाचक सुंन्दर हिंदी कविताएँ, जैसे  , आदमी ,  हकीकत, गमे इश्क का गुबार बाकि था , दोस्त अब थकने लगे हैं 


सबके पास काम बहुत है।


 नहीं जरूरी बूढ़ों की अब, 

हर बच्चा बुद्धिमन बहुत है। 

उजड़ गए सब बाग बागीचे, 

दो गमलों में शान बहुत है।


 मट्ठा धी नहीं खाते हैं,

 कहते हैं जुखाम बहुत है। 

पीते हैं जब चाये तब कहीं, 

कहते हैं आराम बहुत है।


 बंद हो गई चिट्ठी पत्री, 

व्हाट्सएप पर पैगाम बहुत हैं।

झुके झुके हैं स्कूली बच्चे, 

बस्तों में सामान बहुत है।


Hindi Kavita Aadmi (आदमी) 


हक आदमी का छीनकर जीता है आदमी ,
आदमी का खून भी पीता  है आदमी

रंगता है हाथ अपने बेकस के खून से ,
खुंखार दरिंदों से भी बदतर है आदमी
क्यों आदमी अपने को फिर कहता है आदमी।

पी गया आदमी लज्जा को घोलकर ,
बेहयाई की हसि भी हस्ता है आदमी।

जब तक गरज जिससे है , पहचानता उसको ,
फिर याद आदमी को रहता न आदमी।

आदमी को आदमी ले डूबता है साथ ,
आदमी को आज तो जचता न आदमी।
क्यों आदमी अपने को फिर कहता है आदमी।

स्वार्थ में अँधा बना वह बेजुबान भी ,
देखकर अँधेरे भी चुप रहता है आदमी।

पीकर शराबे शौकत संगदिल बना वो ,
बेगुनाहों पर सितम ढाता है आदमी।
क्यों आदमी अपने को फिर कहता है आदमी।

कितनो को फंसता है धोखे के जाल में ,
ईर्ष्या की आग में खुद जलता है आदमी।

वह क्या नहीं खरीदता दौलत के जोर से ,
बिकता है धर्म, ईमान  बिकता है आदमी।
क्यों आदमी अपने को फिर कहता है आदमी।

गुनाहों को पचा लेता है, ताकत के जोर से ,
पूछो नहीं क्या क्या हजम करता है आदमी।

मात दे वो मौत को ताकत के जोर से ,
आज क्यों ऐसा नहीं करता है आदमी।
क्यों आदमी अपने को फिर कहता है आदमी।


गुजर गया जमाना 


जिंदगी के लेखों जोखों में गुजर गया जमाना ,
खुशियों को हम तरसते रहे , 
पर गमों का भरपूर मिला खजाना। 

चंद ख्वाइशों का इस दिल में था आशियाना ,
ये ദിനേശ്  खुद से हो गया बेगाना। 

गमे इश्क का गुबार बाकि था 


रात  को नींद के आगोश में जब सारा शहर बाकि था , 
हमारे लिए झिलमिल चांदनी का कहर बाकि था। 

हर गुनाह को माफ़ करके जिनके दिल से दिल मिला बैठे ,
शायद उनके दिल में हमारे लिए थोड़ा जहर बाकि था। 

चाहे लाखों गम लपेटे हुए था ये दिल, फिर भी ,
रिश्ता मुस्कराहटों से हमारे लवों का, शमो शहर बाकि था।

अँधेरी रात थी पैरों में छाले थे , आँखें सो जाने को बेताब थी ,
मगर मंजिल पाने के लिए अभी मीलों का सफर बाकि था। 

मिल गई चाहे सारी  खुशियां इस जमाने की पर ,
कहीं तो इस दिल में गम -ए  इश्क का गुबार बाकि था। 

हकीकत 

रहने दे आसमां , जमीं  की तलाश कर ,
सब कुछ यहीं है , कहीं और न तलाश कर। 

हर आरजू पूरी हो, तो जीने में क्या मजा ,
जीने के लिए बस एक वजह की तलाश कर। 

ना तुम दूर जाना , न हम दूर जायेंगे ,
अपने अपने हिसे की दोस्ती निभाएंगे। 

बहुत अच्छा लगेगा जिंदगी का ये सफर ,
आप वहां से याद करना , हम यहां से मुस्कराएंगे। 

दोस्तअब थकने लगे हैं


किसी का पेट निकल आया है , किसी के बाल पकने लगे हैं।

सब पर भारी  जिम्मेदारी है , सबको छोटी मोटी  कोई बीमारी है।

दिन भर जो भागते दौड़ते थे , वो अब चलते फिरते भी रुकने लगे  हैं।

पर ये हकीकत है , सब दोस्त अब थकने लगे हैं।

किसी को लोन की फ़िक्र है, कहीं हेल्थ टेस्ट का जिक्र है।

फुरसत की सबको कमी है , आँखों में  अजीब सी नमी है।

कल जो प्यार के खत लिखते थे , आज वो बीमे के फॉर्म भरने  लगे  हैं।

पर  ये हकीकत हैसब दोस्त अब  थकने लगे हैं।


बहुत कुछ पाना बाकि है 

गुजर रही है उम्र , पर अभी जीना बाकि है ,
जिन हालातों ने पटका है जमीं पर , उन्हें उठकर जबाब देना अभी बाकि है। 

चल रहा हूँ मंजिल के सफर में , मंजिल को पाना अभी बाकि है। 
कर  लेने दो लोगों को चर्चे मेरी हार  के, कामयाबी का शोर मचाना अभी बाकि है। 

वक्त को करने दो अपनी मनमानी , मेरा वक्त अभी आना बाकि है ,
कर  रहे सवाल मुझे जो loser समझ कर , उन सबको अभी जबाब देना बाकि है। 

निभा रहा हूँ अपना किरदार जिंदगी के मंच पर, पर्दा गिरते ही तालियां बजना अभी बाकि है ,
कुछ नहीं गया हाथ से अभी तो , बहुत कुछ पाना बाकि है। 


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