Hindi Poem Part-6 | Ahista Chal a Jindagi

Hindi Poem Part-6

आहिस्ता चल ऐ जिंदगी 

 

आहिस्ता चल ऐ जिंदगी,

अभी कुछ कर्ज चुकाना बाकि है,

कुछ दर्द मिटाना बाकि है,

कुछ फर्ज निभाना बाकि है,

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रफ्तार में तेरे चलने से,

कुछ रूठ गए कुछ छूट गए,

रूठों को मनाना बाकि है,

रोतों हो हसाना बाकि है।

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कुछ हसरतें अभी अधूरी है,

कुछ काम जो बहुत जरूरी है,

ख्वाइशें जो घुट गई इस दिल में,

अभी उन्हें दफनाना बाकि है,

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कुछ रिश्ते बनके टूट गए,

कुछ बनते बनते छूट गए,

उन टूटे छूटे रिश्तों के,

जख्मों को मिटाना बाकि है,

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आहिस्ता चल ऐ जिंदगी,

अभी कुछ कर्ज चुकाना बाकि है।



जिंदगी का  फैसला

 

गुजरी हुई जिंदगी को याद न कर,

तकदीर में जो लिखा है उसकी फरियाद न कर,

जो होगा वो होकर रहेगा,

तू कल की फिक्र में अपनी आज की हंसी बर्बाद न कर ।

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हंस मरते हुए भी गाता है,

और मोर नाचते हुए भी रोता है,

यह जिंदगी का फंडा है,

दुखों वाली रात नींद नहीं आती,

और खुशी वाली रात कौन सोता है ।

*******************

कल ना हम होंगे ना कोई गिला होगा,

सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिलसिला होगा,

जो लम्हे है जितने भी हंस कर बिता लेना,

ना जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा।





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