Hindi Shayari Part 23
हिंदी शायरी पार्ट -23
1. किसी को अधूरा पाने से बेहतर है, उसे पूरा छोड़ देना।
2. वही शख्स मेरे लश्कर से बगावत कर गया,
जीतकर सल्तनत जिसके नाम करनी थी।
3. सूखे पत्तों की तरह बिखरे हुए थे हम ,
किसी ने समेटा भी तो आग लगाने के लिए।
4. अगर दिल में रखो तो दिल से रखो ,
वरना दिल रखने के लिए दिल न रखो।
5. दिल को हजार चीखने चिलाने दीजिये ,
जो आपका नहीं है उसे जाने दीजिये।
6. तेरे हर अंदाज अच्छे लगते हैं,
सिवाय नजर अंदाज करने के।
7. कोई खबर न ले तो बुरा मत मानना ,
इस दुनियाँ में खबर लेने वाले कम और फैलाने वाले ज्यादा है।
8. राज कैसे पहुंच गए गैरों तक ,
मशवरे तो हमने अपनों से किये थे।
9, इबादतों में मशरूफ हैं सभी आजकल ,
दिलों को तोड़कर सजदों में रोया जा रहा है।
10. जब मेरे जनाजे पे आओ तो थोड़ा जल्दी आना ,
दफनाने वाले मेरी तरह तुम्हारा इंतजार नहीं करेंगे।
11. वो आये मेरी कब्र पे अपने हमसफ़र को लेकर ,
और लोग कहते हैं के दफनाने बाद जलाया नहीं जाता।
12. अब हम भी खामोश रहकर तेरा सब्र आजमाएंगे ,
देखते हैं तुमको अब हम कब याद आएंगे।
13. गलतफ़हमी ने बातों को बढ़ा डाला यूँ ही वरना ,
कहा कुछ था , वो कुछ समझी , मुझे कुछ और कहना था।
14. मोहब्बत न सही, याद तो किया करो ,
साथ नहीं दे सकते, तो कम से कम बात तो किया करो।
15. वो जो डरा ही नहीं मुझे खोने से ,
वो क्या पछतायेगा मेरे न होने से।
16. वो फिर से जलाना चाहता है मुझे ,
कोई बताये उसे के रख में आग नहीं लगती।
नियते शौक भर न जाये कहीं ,
तू भी दिल से उत्तर न जाये कहीं ,
आज देखा है तुझको देर के बाद ,
आज का दिन गुजर न जाये कहीं।
करीब रहकर भी वो हमे जान नहीं पाए ,
आज तक वो हमे पहचान नहीं पाए ,
खुद ही बना ली हमने दूरियां उनसे ,
ताकि उनपे कोई इल्जाम न आये।
एक समंदर है जो काबू में है मेरे ,
और एक कतरा है जो मुझसे संभाला नहीं जा रहा ,
और एक उम्र गुजारनी है मुझे उसके बिना,
और एक लम्हा है जो मुझसे गुजरा नहीं जा रहा।
उसने अपना दिल टुकड़ों में छांट दिया ,
तेरा है तेरा है कह कर सबमे बाँट दिया ,
मेरा दिल वही कहीं किसी कोने में खो गया ,
मेरे इलावा हर कोई उसका हो गया।
न कर मोहब्बत तेरे बस की बात नहीं ,
जो दिल करे मोहब्बत वो दिल तेरे पास नहीं ,
अगर मैं होता बादशाह तो कानून ऐसा बनाता ,
दिल तोड़ने वालों को सजाये मौत सुनाता।
उसकी गली में मुझको जाना नहीं ,
हाल कैसा है ये भी बताना नहीं ,
बड़ी हसरत है हमें उस दिन की ,
वो कहे मैं हूँ, और मैं कहूं , जी पहचाना नहीं।
बरसों गुजर गए कभी रोकर नहीं देखा ,
आँखों में नींद थी कभी सोकर नहीं देखा ,
वो क्या जाने दर्दे मोहबात ,
जिसने किसी का कभी होकर नहीं देखा।
वो मुझे हर मिन्नत पर चाहिए था ,
आँखों की जीनत पर चाहिए था ,
उसे मुफ्त में ही पा लिया किसी ने,
जो मुझे हर कीमत पे चाहिए था।
हसरतें कुछ और है ,
वक़्त की इच्छा कुछ और है ,
कौन जी सका है जिंदगी अपने मुताबिक ,
दिल चाहता कुछ और है और होता कुछ और है।
ऐसा मत कर , वैसा मत कर ,
उससे कहना छोड़ दिया ,
एक दिन मुझको क्या सूझी,
मैंने ये दुःख सहना छोड़ दिया,
मेरे कहते रहने तक हम दोनों साथ रहे ,
फिर एक दिन मैंने कहना छोड़ दिया,
और उसने रहना छोड़ दिया।
हमने तो दिल से रिश्तो को निभाया था ,
हर वक़्त अपना सब कुछ लगाया था ,
पर जब कद्र कम होने लगी हमारी ,
तब खमोशी ने हमे जीना सिखाया था ,
तब समझ आया हमे भी धीरे धीरे ,
हर जगह ठहरना जरूरी नहीं होता ,
कुछ रिश्ते सिर्फ यादों तक ही अच्छे होते हैं ,
उन्हें जबरदस्ती निभाना जरूरी नहीं होता।
मोहब्बत करती है पर दोस्त बुलाती है,
ये केसा रिश्ता है जो डर डर के निभाती है ।
नजरों से झूमती है लफ्जों से ठुकराती है ,
खुद भी उलझी है और मुझे भी उलझाती है ।
न इस पार आती है न उस पर जाती है ,
हक़ आशिकों का और हद दोस्ती की बताती है ।
किसी और का जिक्र करूं तो जल सी जाती है ,
मेरे हर हिस्से में अपना हिस्सा चाहती है ।
अक्सर पूछती है मुझसे के तुम कौन हो मेरे ,
फिर कसम खाये तो कसम मेरी खाती है ।

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